सतना जिला अस्पताल में रविवार को छह घंटे बिजली बंद रहने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। ब्लड बैंक की ऑनलाइन व्यवस्था ठप रही और परिजन घंटों कतार में खड़े रहे। बैकअप व्यवस्था पर सवाल उठे।
सतना और मैहर में रक्तदान अभियान के तहत एक दिन में 70 यूनिट रक्त संग्रह हुआ। ब्लड बैंक में कमी के बीच यह पहल मरीजों के लिए राहत बनी और समाज में जागरूकता भी बढ़ी।
सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी, केवल 5 यूनिट शेष। कई जरूरी ब्लड ग्रुप खत्म होने से आपात स्थिति का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य अधिकारी ने रक्तदान कर लोगों से अपील की।
सतना जिला अस्पताल के थैलीसीमिया कांड को दो महीने बीत जाने के बाद भी संक्रमित रक्त के संदिग्ध डोनरों की पहचान नहीं हो सकी है। इंदौर से आई सीडीएससीओ की टीम ने एक बार फिर ब्लड बैंक का निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच की, लेकिन आधिकारिक चुप्पी बनी रही।
सतना जिला अस्पताल का ब्लड बैंक गंभीर संकट से गुजर रहा है। एचआईवी कांड के बाद रक्तदान लगभग थम गया है, जिससे निगेटिव और रेयर ब्लड ग्रुप का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है।
रीवा में सरकारी ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी, थैलेसीमिया व कैंसर पीड़ित बच्चों ने कलेक्टर से मदद की गुहार लगाई।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में खून की भारी किल्लत। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे 10–15 दिनों से भर्ती, ब्लड न मिलने से जान का खतरा।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल समेत सभी सरकारी ब्लड बैंक खाली हैं, बी और एबी पॉजिटिव ब्लड की भारी कमी से मरीज परेशान हैं।
सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में गंभीर कमी, केवल 8 यूनिट शेष, मरीजों के लिए निजी अस्पताल से ब्लड मंगवाना पड़ा।
सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में निगेटिव ब्लड ग्रुप पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। ओ पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव के सीमित यूनिट बचे हैं। एचआईवी कांड के बाद रक्तदान में आई कमी से थैलीसीमिया, सिकिल सेल, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की जान पर संकट गहरा गया है।






















